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गरिमा बनाम जिम्मेदारी- प्रधानाचार्यों का एक स्वर—अंकेक्षण कार्य से मुक्ति की मांग (Dignity vs Duty: Principals Unite Against Evaluation Duty Assignment)

गरिमा बनाम जिम्मेदारी- प्रधानाचार्यों का एक स्वर—अंकेक्षण कार्य से मुक्ति की मांग
(Dignity vs Duty: Principals Unite Against Evaluation Duty Assignment)

By-डॉ स्नेह कुशवाहा(भारत टाइम्स न्यूज़ 24)

Bareilly Today News:
बरेली-उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद, बरेली के तत्वाधान में जनपद के प्रमुख शिक्षाविदों ने एकजुट होकर अपनी गरिमा और पद की मर्यादा के संरक्षण हेतु आवाज बुलंद की। प्रान्तीय महामंत्री डॉ. मनोज कुमार, जिला अध्यक्ष डॉ. लाखन सिंह, जिला मंत्री डॉ. अजीत सक्सेना, जिला कोषाध्यक्ष डॉ. कुलदीप कुमार विश्नोई, प्रांतीय संगठन मंत्री डॉ. एस. पी. पांडे, सह जिला मंत्री डॉ. संतोष कुमार गुप्त, डॉ. एस. पी. सक्सेना, महिला उपाध्यक्ष चमन जहाँ, उपाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा, सैयद जाकिर अली, हरि ओम, आसिफ अली, संगठन मंत्री विवेक मोहन सिंह एवं परमेश्वर दयाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने जिला विद्यालय निरीक्षक, बरेली के माध्यम से सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि सभी प्रधानाचार्य वर्ष 2026 के बोर्ड मूल्यांकन कार्य में पूर्ण सहयोग करने के लिए तत्पर हैं, किन्तु उन्हें अंकेक्षक (Evaluator) का कार्य सौंपना उनके पद की गरिमा और प्रतिष्ठा के विपरीत है। परिषद ने इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पूर्व वर्षों में प्रधानाचार्य प्रधान परीक्षक एवं उप नियंत्रक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष उन्हें अंकेक्षक का कार्य देकर उनकी छवि को आघात पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
प्रधानाचार्यों ने सामूहिक रूप से यह भी निर्णय लिया कि यदि अंकेक्षक का कार्य वापस नहीं लिया गया, तो वे इस कार्य के लिए निर्धारित पारिश्रमिक—यहां तक कि 1 रुपया प्रति कॉपी भी—स्वीकार नहीं करेंगे। परिषद ने मूल्यांकन निर्देशिका में किए गए इस परिवर्तन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

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