By-डॉ स्नेह कुमार सिंह कुशवाहा(भारत टाइम्स न्यूज़ 24)
जो हक़ की बात उठाते हैं, वही इतिहास बनाते हैं,
संघर्ष की राह चलने वाले ही मंज़िल तक पहुँच जाते हैं।
Bareilly Today News:
बरेली। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक रामनगर (आंवला) जनपद बरेली की समीक्षा बैठक प्रदेश कार्यकारिणी के दिशा-निर्देशानुसार आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मांडलिक मंत्री मुकेश सिंह चौहान ने की। इस अवसर पर जनपद से पधारे जिला अध्यक्ष शिव स्वरूप शर्मा ने संगठन की वर्तमान गतिविधियों, उपलब्धियों तथा शिक्षकों के अधिकारों के लिए किए जा रहे संघर्षों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने आगामी 4 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित होने वाली विशाल महारैली में अधिक से अधिक शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे स्वयं के साथ कम से कम दो या तीन शिक्षकों को भी साथ लेकर इस ऐतिहासिक रैली में अवश्य शामिल हों।
जिला कोषाध्यक्ष अजरार हुसैन आगा ने संघ द्वारा समय-समय पर किए जा रहे धरना-प्रदर्शन, रैलियों और संघर्षों के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ शिक्षकों के हितों के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन संगठन की एकजुटता ही अंततः सकारात्मक परिणाम लेकर आती है।

आईटी सेल जिला अध्यक्ष शशि भूषण कश्यप ने सोशल मीडिया पर चल रहे #अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया तथा सभी शिक्षकों से डिजिटल माध्यमों के जरिए संगठन की आवाज को मजबूत करने की अपील की।
बैठक के अंत में मांडलिक मंत्री मुकेश सिंह चौहान ने सभी शिक्षकों से 4 अप्रैल की ऐतिहासिक महारैली को सफल बनाने के लिए पूरे ब्लॉक में व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुँचने का आह्वान किया।
समीक्षा बैठक का सफल संचालन वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता ने किया। इस अवसर पर माध्यमिक प्रदेश अध्यक्ष हरिओम सिंह राठौर, जिला उपाध्यक्ष अक्षय कुमार, तहसील अध्यक्ष आलोक कुमार, ब्लॉक अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा सहित शिक्षक संघ के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्राथमिक शिक्षक संघ की यह समीक्षा बैठक केवल संगठनात्मक गतिविधि भर नहीं, बल्कि शिक्षकों की एकजुटता और उनके अधिकारों की आवाज को मजबूत करने का प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार शिक्षक होते हैं और जब शिक्षक संगठित होकर अपने अधिकारों, सम्मान और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए आवाज उठाते हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
आगामी 4 अप्रैल की दिल्ली महारैली इसी एकजुटता का प्रतीक बन सकती है। यदि शिक्षक बड़ी संख्या में इसमें शामिल होते हैं तो यह न केवल उनकी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देगा।
जब एकजुट होकर कदम बढ़ते हैं, तो बदलाव की राह बनती है,
संघर्ष की लौ जलती रहे, तभी अधिकारों की जीत होती है।







