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जनगणना ड्यूटी में अव्यवस्था पर शिक्षकों का फूटा आक्रोश, प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
(Teachers Protest Irregularities in Census Duty, Primary Teachers Association Submits Memorandum to Administration)
By-Dr. Sneh Kushwaha | Bharat Times News 24।Bareilly Today News
बरेली। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल आज जिला अध्यक्ष शिवस्वरूप शर्मा के नेतृत्व में जनगणना कार्य में सामने आ रही विसंगतियों को लेकर जिला प्रशासन से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने जिला जनगणना अधिकारी एवं एडीएम एफआर को संबोधित ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को गंभीर समस्या बताया।
संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन को अवगत कराया कि कई प्रगणकों को एक के स्थान पर दो-दो ब्लॉक आवंटित कर दिए गए हैं, जबकि सुपरवाइजरों को 10 से 12 ब्लॉकों की जिम्मेदारी दी गई है। इससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है और वे मानसिक प्रताड़ना जैसी स्थिति से गुजर रहे हैं। संगठन ने मांग की कि प्रत्येक प्रगणक को केवल एक ब्लॉक तथा सुपरवाइजर को अधिकतम आठ ब्लॉक ही आवंटित किए जाएं, ताकि जनगणना कार्य सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि इस समय परिषदीय विद्यालयों में नामांकन अभियान जोर-शोर से चल रहा है। इसके साथ ही अन्य विभागीय कार्य भी गतिमान हैं, ऐसे में शिक्षकों पर स्व-गणना (Self Enumeration) का अनावश्यक दबाव बनाना उचित नहीं है। संगठन का कहना था कि लगातार बढ़ते गैर-शैक्षिक कार्यों के कारण विद्यालयी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और शिक्षकों का मूल दायित्व शिक्षा कार्य पीछे छूटता जा रहा है।
एडीएम एफआर के अवकाश पर होने के कारण उनका ज्ञापन उनके पेशकार को सौंपा गया। पेशकार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों और समस्याओं से संबंधित सभी बिंदु एडीएम एफआर तक पहुंचाए जाएंगे तथा उचित कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर जिला मंत्री रोहित सिंह, जिला कोषाध्यक्ष अजरार हुसैन आगा, जिला अध्यक्ष आईटी सेल शशि भूषण कश्यप, सरल त्रिवेदी, कामता प्रसाद गंगवार, नीतू चौधरी, रागनी गुप्ता, प्रतिभा गौतम, शिवि शर्मा, जय सिंह, आलोक कुमार, संजीव सिंह, मोहम्मद शारिक, शिव सम्पत, सुभाष चन्द्र सहित अनेक शिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में शिक्षकों की भागीदारी नई बात नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक व्यवस्थाएं संतुलित और व्यावहारिक हैं? यदि एक शिक्षक को उसकी क्षमता से अधिक ब्लॉक सौंपे जाएंगे, तो इसका सीधा असर उसकी कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
वर्तमान समय में परिषदीय विद्यालय पहले ही नामांकन, पोषण अभियान, सर्वेक्षण और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त दबाव शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। शिक्षक संगठन की यह मांग केवल सुविधाओं की मांग नहीं, बल्कि कार्य के न्यायसंगत वितरण और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा भी है।
प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि वह जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को सफल बनाने के साथ-साथ शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को भी गंभीरता से सुने। क्योंकि किसी भी सरकारी अभियान की सफलता केवल आदेशों से नहीं, बल्कि कार्य करने वाले कर्मचारियों के संतुलित सहयोग और मनोबल पर निर्भर करती है।








