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ग्राम जाम में 75 वर्षों की रामलीला परंपरा का भव्य समापन, जय श्रीराम के जयघोष के बीच हुआ रावण दहन
(Shri Adarsh Ramlila Committee Jam Celebrates 75 Years of Tradition; Ravana Dahan Marks Grand Conclusion of Ramleela)
By Dr. Sneh Kushwaha (Bharat Times News 24)
Bareilly Today News
मीरगंज/बरेली-
मीरगंज ब्लॉक के
ग्राम जाम में श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला का अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति, उत्साह और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। रामलीला के समापन अवसर पर बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। जैसे ही रावण दहन का क्षण आया, पूरा रामलीला परिसर भगवान श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस अवसर पर हजारों की संख्या में ग्रामवासी एवं क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। लोगों ने पूरे उत्साह के साथ रामलीला के अंतिम कार्यक्रम का आनंद लिया और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद किया।
ग्राम जाम की श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित इस रामलीला का इतिहास भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। कमेटी के माध्यम से पिछले 75 वर्षों से रामलीला की परंपरा निरंतर आगे बढ़ाई जा रही है। तीन चौथाई शताब्दी से चली आ रही यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा आज भी ग्रामीण समाज में आस्था, संस्कार और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। बदलते समय के साथ जहां मनोरंजन के साधनों में व्यापक परिवर्तन आया है, वहीं ग्राम जाम में रामलीला की परंपरा आज भी लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।
75 वर्षों से कायम है आस्था और परंपरा का यह संगम-
ग्राम जाम में श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीते 75 वर्षों से इस आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, त्याग, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

रामलीला भारतीय लोक संस्कृति की ऐसी परंपरा है, जिसके माध्यम से समाज को अच्छाई और बुराई के बीच के अंतर को समझने का अवसर मिलता है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, न्याय, अनुशासन, परिवार के प्रति जिम्मेदारी, समाज के प्रति कर्तव्य और कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
ग्राम जाम में सात दशकों से अधिक समय से आयोजित हो रही रामलीला इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण अंचलों में आज भी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रति लोगों की गहरी आस्था बनी हुई है। इस आयोजन से बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक को जुड़ने का अवसर मिलता है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और रामायण के आदर्शों से परिचित होती है।
रावण दहन के साथ हुआ रामलीला का समापन-
रामलीला के अंतिम दिन आयोजित रावण दहन कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्रीय लोग एकत्रित हुए। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। रावण दहन को असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म, अहंकार पर विनम्रता और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

रावण का चरित्र हमें यह संदेश देता है कि व्यक्ति चाहे कितना ही शक्तिशाली, विद्वान और सामर्थ्यवान क्यों न हो, यदि उसमें अहंकार, अन्याय और अधर्म का भाव आ जाए तो उसका पतन निश्चित है। इसके विपरीत भगवान श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि सत्य, संयम, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति समाज के लिए आदर्श बनता है।
रावण दहन के अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस धार्मिक परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। कार्यक्रम के समापन के साथ ही ग्राम जाम की ऐतिहासिक रामलीला का एक और आयोजन यादगार बन गया।
अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 75 वर्षों की परंपरा को बताया गौरव की बात-
श्री आदर्श रामलीला कमेटी ग्राम जाम के अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में रामलीला की 75 वर्षों की परंपरा विशेष चर्चा का विषय रही। इतने लंबे समय तक किसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की निरंतरता बनाए रखना गांव के लोगों की आस्था, सहभागिता और परंपरा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
ग्राम जाम में श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला का आयोजन पिछले 75 वर्षों से किया जा रहा है। यह हमारे गांव के लिए गर्व और सम्मान की बात है कि कई पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आज भी लोग पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।
हमारी कोशिश रहती है कि गांव की इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे भी इसी तरह बनाए रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासत से जुड़ी रहें। रामलीला के आयोजन में ग्रामवासियों का सहयोग और सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। सभी लोगों के सहयोग से ही इतने वर्षों से यह परंपरा निरंतर चल रही है। हम सभी ग्रामवासियों और सहयोग करने वाले लोगों का आभार व्यक्त करते हैं और आशा करते हैं कि भविष्य में भी इसी प्रकार सभी का सहयोग मिलता रहेगा।”
उपाध्यक्ष गोविन्द सिंह यादव मोनू ने जताया ग्रामवासियों का आभार-
“ग्राम जाम में श्री आदर्श रामलीला कमेटी की रामलीला का 75 वर्षों से लगातार आयोजित होना हम सभी के लिए गौरव की बात है। यह परंपरा हमारे बुजुर्गों की देन है, जिसे आज की पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। रामलीला के माध्यम से समाज को भगवान श्रीराम के आदर्शों और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश मिलता है।
हम चाहते हैं कि गांव की यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार जारी रहे। इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों की सहभागिता और सहयोग महत्वपूर्ण है। हम सभी उपस्थित लोगों, सहयोगियों और रामलीला के प्रति श्रद्धा रखने वाले ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। हमारी यही कामना है कि भगवान श्रीराम की कृपा सभी पर बनी रहे और गांव में सुख, शांति, समृद्धि तथा आपसी भाईचारा कायम रहे।”
इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति-
ग्राम जाम में आयोजित श्री आदर्श रामलीला कमेटी के इस कार्यक्रम में कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, उपाध्यक्ष गोविन्द सिंह यादव मोनू, अनिल यादव, आदेश यादव, महावीर सिंह यादव, विनोद शर्मा और पप्पू यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि गांव में रामलीला की परंपरा आज भी लोगों के बीच विशेष स्थान रखती है। ग्रामीणों की सहभागिता ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया और रामलीला के समापन अवसर पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला।
स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं, सामूहिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर भी है। गांव के लोगों का एक साथ एकत्रित होना सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करता है।
नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है भगवान श्रीराम का संदेश-
आज के आधुनिक दौर में जहां नई पीढ़ी का झुकाव डिजिटल मनोरंजन और आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है, वहीं रामलीला जैसे पारंपरिक आयोजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रामलीला के माध्यम से बच्चों और युवाओं को रामायण के प्रसंगों, भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को समझने का अवसर मिलता है। यह आयोजन उन्हें सत्य बोलने, बड़ों का सम्मान करने, अपने कर्तव्यों का पालन करने, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
ग्राम जाम में 75 वर्षों से जारी रामलीला की परंपरा इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह गांव की सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनी हुई है। ऐसे आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि संस्कृति केवल पुस्तकों में सुरक्षित रखने से नहीं, बल्कि व्यवहार और परंपराओं में जीवित रखने से आगे बढ़ती है।
रावण दहन का सामाजिक संदेश, अहंकार का अंत और सत्य की विजय-
रावण दहन का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक महत्व भी है। रावण का पुतला जलना इस बात का प्रतीक है कि समाज में बुराई, अन्याय, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने की आवश्यकता है।
भगवान श्रीराम का जीवन हमें बताता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर मौजूद क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, अन्याय और गलत आचरण जैसी बुराइयों को दूर करने का संकल्प ले।
ग्राम जाम में रामलीला के अंतिम दिन आयोजित रावण दहन ने इसी संदेश को एक बार फिर सामने रखा। यह अवसर लोगों को अपने जीवन में अच्छे विचारों, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बना आयोजन-
ग्राम जाम की श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा 75 वर्षों से चली आ रही परंपरा यह दर्शाती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस प्रकार के कार्यक्रम गांव के लोगों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जहां वे अपनी आस्था प्रकट करने के साथ-साथ आपसी मेलजोल और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं।
रामलीला जैसे आयोजन सामाजिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इनके माध्यम से लोगों में सहयोग, सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। किसी भी गांव की पहचान केवल उसके भौगोलिक क्षेत्र या आबादी से नहीं, बल्कि उसकी परंपराओं, संस्कृति और लोगों के आपसी संबंधों से भी बनती है।
ग्राम जाम में 75 वर्षों से आयोजित रामलीला इसी सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण है। समय के साथ पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन भगवान श्रीराम की लीला के प्रति लोगों की आस्था और इस आयोजन को आगे बढ़ाने की भावना कायम रही।
ग्राम जाम में श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा 75 वर्षों से रामलीला का आयोजन किया जाना धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रेरणादायक उदाहरण है। यह आयोजन बताता है कि जब किसी परंपरा के साथ समाज का सामूहिक जुड़ाव होता है, तो वह परंपरा समय के बदलाव के बावजूद जीवित रहती है।
आज आवश्यकता है कि गांवों में आयोजित होने वाले ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इनके मूल संदेश को भी समाज तक पहुंचाया जाए। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाना, सत्य के मार्ग पर चलना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना और अन्याय का विरोध करना ही रामलीला की वास्तविक सार्थकता है।
रावण दहन हमें यह याद दिलाता है कि बुराई कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखाई दे, अंततः सत्य और धर्म का महत्व सर्वोपरि रहता है। ग्राम जाम की यह 75 वर्ष पुरानी परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहे, यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
संदेश स्पष्ट है—परंपराएं तभी जीवित रहती हैं, जब समाज उन्हें अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे बढ़ाता है। ग्राम जाम की श्री आदर्श रामलीला कमेटी ने 75 वर्षों की यात्रा के माध्यम से इसी सांस्कृतिक निरंतरता का परिचय दिया है।
सत्य की राह पर चलना ही श्रीराम का संदेश है,
अधर्म और अहंकार का अंत ही धर्म का विशेष है।
रावण के पुतले के साथ बुराइयों का भी दहन हो,
हर घर में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का आगमन हो।






