By-डॉ स्नेह कुशवाहा(भारत टाइम्स न्यूज़ 24)
“सम्मान की ये माला, विश्वास की ये डोर,
शिक्षक का मान बढ़े, यही है जन-जन का जोर।”
Bareilly Today News:
बरेली में आज शिक्षक सम्मान और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब शिक्षक विधायक डॉ हरि सिंह ढिल्लों के आगमन पर अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के विषय विशेषज्ञ शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने उनका भव्य स्वागत किया। फूल-मालाओं और आत्मीय अभिनंदन से अभिभूत डॉ ढिल्लों ने सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सदस्य विधान परिषद कुंवर महाराज सिंह सहित मनोज कुमार, संदीप इंदवार, छत्रपाल सिंह, संजय सिंह, उपेन्द्र सिरोही, नीरज मिश्रा, संतोष उपाध्याय,यशपाल सिंह, के. पी. सिंह,ओमवीर सिंह, ए. आर. गंगवार, मनोज यादव समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

डॉ ढिल्लों ने अपने संबोधन में कहा कि,
“शिक्षकों का सम्मान ही समाज की प्रगति का आधार है। पुरानी पेंशन बहाली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारी प्रतिबद्धता हमेशा अडिग रहेगी। शिक्षकों की आवाज सदन में मजबूती से उठाई जाती रहेगी।”

कुंवर महाराज सिंह ने कहा,
“शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है। उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है। आज का यह उत्साह दर्शाता है कि शिक्षक वर्ग जागरूक और संगठित है।”

इसके बाद डॉ ढिल्लों ने जनपद के चार प्रमुख मूल्यांकन केंद्र—एस वी इंटर कॉलेज, एफ आर इस्लामिया इंटर कॉलेज, जीआईसी और जीजीआईसी—का भ्रमण किया। प्रत्येक केंद्र पर बड़ी संख्या में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया।
शिक्षकों ने एक स्वर में डॉ ढिल्लों के प्रयासों की सराहना की, विशेष रूप से कैशलेस चिकित्सा सुविधा और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को पेंशन के दायरे में लाने जैसे कदमों के लिए आभार जताया।

बरेली में हुआ यह आयोजन केवल एक स्वागत समारोह नहीं, बल्कि शिक्षक समुदाय की एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक भी है। वर्तमान समय में जब शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे में शिक्षकों के अधिकारों और सुविधाओं पर गंभीर पहल सकारात्मक संकेत देती है।
डॉ हरि सिंह ढिल्लों के प्रयासों को मिल रहा व्यापक समर्थन यह दर्शाता है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील और सक्रिय हो, तो शिक्षा क्षेत्र में ठोस बदलाव संभव हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रयास किस हद तक नीतिगत बदलावों में परिवर्तित हो पाते हैं।








