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विधान परिषद में शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों की दो बड़ी पहल, विद्यालयों के लिए सोलर पैनल अनुदान और फर्जी शिकायतों पर जांच रोकने की उठाई मांग(Teacher MLC Dr. Hari Singh Dhillon Raises Two Key Education Issues in UP Legislative Council, Seeks Solar Panel Subsidy for Schools and Action Against Fake Complaints)
By-डॉ स्नेह कुमार सिंह कुशवाहा।भारत टाइम्स न्यूज़ 24 | लखनऊ टुडे न्यूज़
लखनऊ-उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के प्रथम दिन शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विद्यालयों तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषय सदन में प्रभावी ढंग से उठाकर शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
डॉ. ढिल्लों ने नियम 111 के अंतर्गत सूचना देते हुए मांग की कि जिस प्रकार प्रदेश सरकार आम नागरिकों को अनुदान पर सोलर पैनल उपलब्ध करा रही है, उसी प्रकार सहायता प्राप्त, अशासकीय एवं अन्य विद्यालयों को भी सोलर पैनल लगाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि विद्यालयों में बिजली की बढ़ती लागत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने के लिए यह कदम अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इससे विद्यालयों के आर्थिक संसाधनों की बचत होगी और वह राशि विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में खर्च की जा सकेगी।
इसके अतिरिक्त नियम 110 के अंतर्गत डॉ. ढिल्लों ने एक और गंभीर विषय उठाते हुए कहा कि विद्यालयों के विरुद्ध फर्जी नाम, गलत पते अथवा गुमनाम शिकायतों के आधार पर बार-बार जांच कराए जाने से शिक्षण संस्थानों का अनावश्यक उत्पीड़न होता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी शिकायतों को बिना प्रथम दृष्टया सत्यापन के जांच का आधार न बनाया जाए। यदि शिकायतकर्ता की पहचान एवं तथ्यों की पुष्टि नहीं होती है तो उस आधार पर विद्यालयों को परेशान न किया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और यदि उन्हें निराधार शिकायतों के माध्यम से बार-बार जांच एवं प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ेगा तो उसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करे जिससे वास्तविक शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो, लेकिन झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के माध्यम से किसी भी विद्यालय का उत्पीड़न न हो।
शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों द्वारा उठाए गए दोनों मुद्दे केवल विद्यालयों की सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी सीधे जुड़े हुए हैं। विद्यालयों में सोलर पैनल की व्यवस्था होने से ऊर्जा व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा हरित ऊर्जा के प्रति विद्यार्थियों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
वहीं, फर्जी शिकायतों के आधार पर होने वाली जांच पर नियंत्रण की मांग भी समय की आवश्यकता प्रतीत होती है। यह आवश्यक है कि वास्तविक शिकायतों की निष्पक्ष जांच अवश्य हो, किंतु दुर्भावनापूर्ण एवं बेनाम शिकायतों को विद्यालयों के उत्पीड़न का माध्यम बनने से रोका जाए। इससे शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को भयमुक्त वातावरण मिलेगा और वे अपनी ऊर्जा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में लगा सकेंगे।
अब शिक्षा जगत की निगाहें प्रदेश सरकार पर हैं कि वह इन दोनों महत्वपूर्ण सुझावों पर क्या निर्णय लेती है। यदि इन मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो इससे प्रदेश के हजारों विद्यालयों, लाखों विद्यार्थियों तथा समूची शिक्षा व्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।
विधान परिषद में शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों की दो बड़ी पहल, विद्यालयों के लिए सोलर पैनल अनुदान और फर्जी शिकायतों पर जांच रोकने की उठाई मांग(Teacher MLC Dr. Hari Singh Dhillon Raises Two Key Education Issues in UP Legislative Council, Seeks Solar Panel Subsidy for Schools and Action Against Fake Complaints)
By-डॉ स्नेह कुमार सिंह कुशवाहा।भारत टाइम्स न्यूज़ 24 | लखनऊ टुडे न्यूज़
लखनऊ-उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के प्रथम दिन शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विद्यालयों तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषय सदन में प्रभावी ढंग से उठाकर शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
डॉ. ढिल्लों ने नियम 111 के अंतर्गत सूचना देते हुए मांग की कि जिस प्रकार प्रदेश सरकार आम नागरिकों को अनुदान पर सोलर पैनल उपलब्ध करा रही है, उसी प्रकार सहायता प्राप्त, अशासकीय एवं अन्य विद्यालयों को भी सोलर पैनल लगाने के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि विद्यालयों में बिजली की बढ़ती लागत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने के लिए यह कदम अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इससे विद्यालयों के आर्थिक संसाधनों की बचत होगी और वह राशि विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में खर्च की जा सकेगी।
इसके अतिरिक्त नियम 110 के अंतर्गत डॉ. ढिल्लों ने एक और गंभीर विषय उठाते हुए कहा कि विद्यालयों के विरुद्ध फर्जी नाम, गलत पते अथवा गुमनाम शिकायतों के आधार पर बार-बार जांच कराए जाने से शिक्षण संस्थानों का अनावश्यक उत्पीड़न होता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी शिकायतों को बिना प्रथम दृष्टया सत्यापन के जांच का आधार न बनाया जाए। यदि शिकायतकर्ता की पहचान एवं तथ्यों की पुष्टि नहीं होती है तो उस आधार पर विद्यालयों को परेशान न किया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और यदि उन्हें निराधार शिकायतों के माध्यम से बार-बार जांच एवं प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ेगा तो उसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करे जिससे वास्तविक शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो, लेकिन झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के माध्यम से किसी भी विद्यालय का उत्पीड़न न हो।
शिक्षक विधायक डॉ. हरी सिंह ढिल्लों द्वारा उठाए गए दोनों मुद्दे केवल विद्यालयों की सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी सीधे जुड़े हुए हैं। विद्यालयों में सोलर पैनल की व्यवस्था होने से ऊर्जा व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा हरित ऊर्जा के प्रति विद्यार्थियों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
वहीं, फर्जी शिकायतों के आधार पर होने वाली जांच पर नियंत्रण की मांग भी समय की आवश्यकता प्रतीत होती है। यह आवश्यक है कि वास्तविक शिकायतों की निष्पक्ष जांच अवश्य हो, किंतु दुर्भावनापूर्ण एवं बेनाम शिकायतों को विद्यालयों के उत्पीड़न का माध्यम बनने से रोका जाए। इससे शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को भयमुक्त वातावरण मिलेगा और वे अपनी ऊर्जा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में लगा सकेंगे।
अब शिक्षा जगत की निगाहें प्रदेश सरकार पर हैं कि वह इन दोनों महत्वपूर्ण सुझावों पर क्या निर्णय लेती है। यदि इन मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो इससे प्रदेश के हजारों विद्यालयों, लाखों विद्यार्थियों तथा समूची शिक्षा व्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।






