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न्याय पंचायत चुरई दलपतपुर में संकुल संगोष्ठी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
(Cluster Seminar Organized in Nyaya Panchayat Churai Dalpatpur, Teachers Shared Experiences for Quality Education)
By- डॉ. स्नेह कुशवाहा।Bharat Times News 24 | Bareilly Today News
मीरगंज/बरेली-
न्याय पंचायत चुरई दलपतपुर की संकुल संगोष्ठी का आयोजन प्राथमिक विद्यालय ठिरिया ब्रह्मानान में किया गया। संगोष्ठी में शासन द्वारा निर्धारित एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा एवं विचार-विमर्श करते हुए विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को विकसित करने तथा शिक्षकों के बीच बेहतर शैक्षिक अनुभवों के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।
संगोष्ठी के दौरान बाल वाटिका, HPC, दीक्षा, संदर्शिका, शिक्षक डायरी तथा विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों, गतिविधि आधारित शिक्षण तथा विद्यार्थियों को सीखने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
निपुण भारत मिशन की ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शबाना ने लाइब्रेरी, शिक्षक डायरी एवं निपुण प्लस ऐप के प्रभावी उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने शिक्षकों से डिजिटल संसाधनों का अधिकतम एवं योजनाबद्ध उपयोग करते हुए विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति पर निरंतर ध्यान देने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में नोडल संकुल शिक्षक अमित कुमार ने गणित विषय में स्थानीय मान की अवधारणा को सरल एवं गतिविधि आधारित तरीके से समझाया। उन्होंने बताया कि बच्चों में स्थानीय मान की स्पष्ट समझ विकसित करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि तीलियों, डीन्स ब्लॉक, मान चार्ट एवं रंगीन काउंटर्स जैसी शिक्षण-सामग्री का क्रमबद्ध एवं व्यवहारिक प्रयोग अत्यंत उपयोगी साबित होता है। गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अवधारणाएं आसानी से समझाई जा सकती हैं और उनका सीखना अधिक स्थायी बनाया जा सकता है।
संकुल शिक्षक मोहम्मद नाजिम एवं विपिन कुमार ने अपने शिक्षण अनुभव एवं विचार साझा करते हुए विद्यालयों में बच्चों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने तथा कक्षा-कक्ष में सकारात्मक एवं सीखने योग्य वातावरण विकसित करने पर जोर दिया।
वहीं सायमा अख्तर ने लेखन अभ्यास को प्रभावी बनाने में शिक्षण-सामग्री की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित लेखन का अभ्यास कराने के साथ-साथ रुचिकर एवं गतिविधि आधारित सामग्री का प्रयोग किया जाए तो बच्चों की भाषा संबंधी दक्षताओं में बेहतर सुधार लाया जा सकता है।
डॉ. रोहतास कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनमें संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक के रूप में विकसित करना भी है।
संगोष्ठी के दौरान शिक्षकों के बीच संवाद एवं अनुभवों के आदान-प्रदान ने कार्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाया। विभिन्न शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में अपनाई जा रही गतिविधियों एवं नवाचारों की जानकारी साझा करते हुए एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में ओमेंद्र पाल गंगवार ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगोष्ठी को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
संकुल संगोष्ठी जैसे आयोजन प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब शिक्षक अपने अनुभव, नवाचार और शिक्षण-पद्धतियां एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं, तो उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलता है। विशेष रूप से गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग और नैतिक मूल्यों के समावेश से शिक्षा को अधिक व्यवहारिक एवं प्रभावशाली बनाया जा सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी संगोष्ठियों में सामने आए उपयोगी सुझावों को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर विद्यालयों की कक्षाओं में नियमित रूप से लागू किया जाए, ताकि ‘निपुण’ लक्ष्य को वास्तविक शैक्षिक उपलब्धि में बदला जा सके।







