HeatWave2026 – Bharat Times News 24 https://bharattimesnews24.com Bharat Times News 24 Portal Sat, 23 May 2026 05:15:13 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 झुलसाने वाली गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) से सावधान! हीटस्ट्रोक के लक्षण, कारण,बचाव एवं उपचार (Beware of Scorching Heat and Heat Stroke! Symptoms, Causes, Prevention and Treatment) https://bharattimesnews24.com/uncategorized/%e0%a4%9d%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%b9/ Sat, 23 May 2026 05:15:10 +0000 https://bharattimesnews24.com/?p=2648 झुलसाने वाली गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) से सावधान! हीटस्ट्रोक के लक्षण, कारण,बचाव एवं उपचार
(Beware of Scorching Heat and Heat Stroke! Symptoms, Causes, Prevention and Treatment)

लेखक- डॉ. स्नेह कुमार सिंह कुशवाहा।

धरती तप रही है।
आसमान से आग बरस रही है। सड़कों पर चलते लोग, खेतों में काम करते किसान,जनगणना करते कर्मचारी, निर्माण स्थलों पर श्रमिक,यातायात नियंत्रित करते पुलिसकर्मी और रोज़मर्रा की जीविका के लिए संघर्षरत लाखों लोग इस समय प्रकृति की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहे हैं। गर्मी अब केवल एक मौसम नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसी चुनौती बन चुकी है जो मानव स्वास्थ्य, जीवनशैली और अस्तित्व तक को प्रभावित कर रही है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। कहीं 45 डिग्री तो कहीं 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता पारा यह संकेत दे रहा है कि प्रकृति हमें चेतावनी दे रही है।

ऐसे समय में सबसे बड़ा खतरा केवल गर्मी नहीं, बल्कि लू (Heat Stroke) है। हर वर्ष हजारों लोग इसकी चपेट में आते हैं और अनेक लोगों की जान तक चली जाती है। दुखद बात यह है कि अधिकांश मामलों में थोड़ी-सी सावधानी और जागरूकता से इन दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

लू आखिर है क्या? (What is Heat Stroke?)
मानव शरीर सामान्यतः लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कार्य करता है। शरीर पसीने के माध्यम से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालकर स्वयं को ठंडा रखने का प्रयास करता है। लेकिन जब बाहरी तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर की ताप-नियंत्रण प्रणाली असफल होने लगती है, तब शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।
जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाए और व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक कार्यक्षमता प्रभावित होने लगे, तब इस स्थिति को हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) कहा जाता है। यह एक चिकित्सकीय आपातकाल (Medical Emergency) है, जिसमें तत्काल उपचार न मिलने पर मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और अन्य महत्वपूर्ण अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण- (Major Symptoms of Heat Stroke)
लू लगने के लक्षणों को पहचानना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सामान्यतः निम्न संकेत दिखाई देते हैं—
शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाना।
तेज सिरदर्द और चक्कर आना।
अत्यधिक कमजोरी और थकान।
त्वचा का लाल, गर्म और शुष्क हो जाना।
पसीना आना बंद हो जाना या बहुत कम हो जाना।
तेज प्यास लगना।
उल्टी अथवा मितली महसूस होना।
दिल की धड़कन तेज होना।
सांस लेने में परेशानी।
भ्रम की स्थिति या मानसिक असंतुलन।
बेहोशी या अचेत अवस्था।
यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें, तो इसे साधारण कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

किन लोगों को सबसे अधिक खतरा? (Who Are at the Highest Risk?)
यद्यपि हीट स्ट्रोक किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ वर्ग अधिक जोखिम में होते हैं—
छोटे बच्चे।
बुजुर्ग व्यक्ति।
गर्भवती महिलाएं।
मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीज।
किसान एवं खेतिहर मजदूर।
निर्माण कार्य में लगे श्रमिक।
ट्रैफिक पुलिसकर्मी।
रिक्शा, ऑटो एवं ई-रिक्शा चालक।
खिलाड़ी एवं खुले मैदान में कार्य करने वाले लोग।

गरीबी और संसाधनों की कमी भी इस खतरे को बढ़ा देती है। जिन लोगों को पर्याप्त पानी, छाया या शीतल वातावरण उपलब्ध नहीं होता, वे अधिक प्रभावित होते हैं।

बढ़ती गर्मी के पीछे छिपे कारण- (Underlying Causes Behind Rising Heat)

1. जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
औद्योगीकरण और बढ़ते प्रदूषण ने वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ा दी है। परिणामस्वरूप पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है।
2. वनों की कटाई (Deforestation)
पेड़-पौधे पृथ्वी के प्राकृतिक शीतलक हैं। लेकिन अंधाधुंध कटाई के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है।
3. कंक्रीट के जंगल (Concrete Jungles and Urban Heat Islands)
शहरों में बढ़ती इमारतें, सड़कें और कम होते हरित क्षेत्र वातावरण को और अधिक गर्म बना रहे हैं।
4. जल स्रोतों का सिकुड़ना (Shrinking Water Resources)
तालाब, झीलें और नदियां स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके कम होने से गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है।

हाल की घटनाएं- एक गंभीर चेतावनी (Recent Incidents: A Serious Warning)

पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया है। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तापमान कई बार 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु नियंत्रण के प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य में हीट वेव और अधिक घातक रूप धारण कर सकती है।

लू से बचाव के प्रभावी उपाय- (Effective Measures to Prevent Heat Stroke)
गर्मी के मौसम में बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें।
सिर को टोपी, गमछे या छाते से ढककर रखें।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सुरक्षा दें।
शराब और अत्यधिक कैफीन से बचें।
खुले स्थानों पर कार्य करने वालों को समय-समय पर विश्राम करना चाहिए।

लू से बचाव में उपयोगी पेय पदार्थ- (Beneficial Drinks for Heat Stroke Prevention)
भारतीय परंपरा में अनेक ऐसे पेय पदार्थ हैं जिन्हें गर्मी का प्राकृतिक रक्षक माना जाता है।
आम पन्ना (Raw Mango Drink)
कच्चे आम से बना यह पेय लू से बचाव का सबसे लोकप्रिय घरेलू उपाय माना जाता है। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है।
छाछ (Buttermilk)
छाछ शरीर को ठंडक देती है और पाचन को बेहतर बनाती है।
नींबू पानी (Lemon Water)
नमक और चीनी युक्त नींबू पानी शरीर में पानी और लवणों की कमी को पूरा करता है।
नारियल पानी (Coconut Water)
पोटैशियम और खनिजों से भरपूर नारियल पानी गर्मी में प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करता है।
बेल का शरबत (Wood Apple Sherbet)
यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
सत्तू का घोल (Sattu Drink)
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकप्रिय यह पेय लंबे समय तक शरीर को ऊर्जा और ठंडक प्रदान करता है।
गन्ने का रस (Sugarcane Juice)
तुरंत ऊर्जा देने वाला यह पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।
जलजीरा (Jaljeera)
गर्मी में ताजगी और पाचन शक्ति दोनों को बनाए रखने में सहायक है।
ओआरएस घोल (ORS Solution)
अत्यधिक पसीना आने पर शरीर में खोए हुए लवणों की पूर्ति का सबसे प्रभावी माध्यम है।

लू से बचाव में उपयोगी खाद्य पदार्थ- (Useful Foods for Heat Stroke Prevention)
केवल पेय पदार्थ ही नहीं, बल्कि कुछ खाद्य पदार्थ भी शरीर को गर्मी से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।
तरबूज (Watermelon)
लगभग 90 प्रतिशत जल से भरपूर यह फल गर्मी का प्राकृतिक वरदान है।
खरबूजा (Muskmelon)
शरीर को ठंडक और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।
खीरा एवं ककड़ी (Cucumber and Kakdi)
शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने के लिए अत्यंत उपयोगी।
दही (Curd/Yogurt)
शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।
पुदीना (Mint Leaves)
पुदीना शरीर में ताजगी और शीतलता का अनुभव कराता है।
प्याज (Onion)
ग्रामीण भारत में लू से बचाव हेतु प्याज को विशेष महत्व दिया जाता है। सलाद के रूप में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।
संतरा और मौसमी (Orange and Sweet Lime)
विटामिन-सी और जल से भरपूर ये फल शरीर को तरोताजा रखते हैं।
लौकी, तोरई, परवल जैसी हरी सब्जियां (Bottle Gourd, Ridge Gourd and Green Vegetables)
ये हल्की, सुपाच्य और शरीर को ठंडक देने वाली सब्जियां हैं।

यदि किसी को लू लग जाए तो क्या करें? (What to Do if Someone Suffers from Heat Stroke?)
यदि किसी व्यक्ति को लू लग जाए तो तत्काल निम्न कदम उठाएं—
उसे तुरंत छायादार या ठंडी जगह पर ले जाएं।
कपड़े ढीले कर दें।
ठंडे पानी की पट्टियां रखें।
पंखे या कूलर की हवा उपलब्ध कराएं।
होश में होने पर ओआरएस, नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ दें।
गंभीर स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।
ध्यान रखें कि बेहोश व्यक्ति को जबरन पानी नहीं पिलाना चाहिए।

सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी-(Social Responsibility is Equally Important)-
गर्मी और लू से बचाव केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे। सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ, छायादार विश्राम स्थल, श्रमिकों के लिए ठंडे पेयजल की व्यवस्था और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण समय की आवश्यकता है।
हर नागरिक यदि एक पेड़ लगाने और उसे संरक्षित करने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिल सकता है।

सावधानी ही सुरक्षा है- (Prevention is Protection)
झुलसाने वाली गर्मी और लू आधुनिक समय की एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। बदलते पर्यावरण, बढ़ते तापमान और घटते हरित क्षेत्रों के बीच जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। पानी, परहेज और सावधानी—ये तीन शब्द इस मौसम में जीवन रक्षक मंत्र हैं।
गर्मी हर वर्ष आएगी, लेकिन यदि हम समय रहते सचेत हो जाएं, तो इसके दुष्प्रभावों से स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

“जब धरती अंगारों सी तपने लगे,
जब हवाएं आग उगलने लगें,
तब केवल छांव नहीं, जागरूकता भी जरूरी है।
एक गिलास पानी, एक पेड़ की हरियाली,
और थोड़ी-सी सावधानी,
कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।”

“Heat Waves May Be Seasonal, But Awareness Must Be Permanent.”

“लू मौसम की देन है, लेकिन उससे बचाव हमारी समझदारी की पहचान है।”

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